·
QUOTES · विचार
Words Worth Sharing
भीषण गर्मी गा रही, तपन-जलन का राग।
सूरज भी बरसा रहा, आसमान से आग।।
पेड़ काटना पाप बड़ा, ऐसा पाप न घना करें।
कहें कुल्हाड़ी वालों से, पेड़ न काटें मना करें।।
तन ठिगने से हो गये, बौने हुए विचार।
अन्दर मन ओछा हुआ, बाहर धन-विस्तार।।
सहयोगी चिन्तन बढ़े, उपयोगी हों काम।
गतिविधियाँ दुर्योग की, उन पर लगे लगाम।।
शुक्रदेवजी याचना, कर लें यह स्वीकार।
सोच स्वार्थ के नष्ट हों, बढ़े परस्पर प्यार।।
घोर तम में ज्योति बन जलते रहो।
सौम्य-साँचों में सदा ढलते रहो।।
कविता
आख़िरी ख़त
डॉ पाथिक
पांडुलिपि से किताब तक
अपनी कविताएँ, ग़ज़लें या कहानियाँ भेजिए। संपादन, कवर और छपाई हम सँभालेंगे, ताकि आपकी किताब पाठकों तक पहुँचे।
-
1
पांडुलिपि भेजिएअपनी रचनाएँ अपलोड कीजिए, कुछ ही मिनट में।
-
2
संपादन और कवरभाषा की जाँच और आकर्षक कवर डिज़ाइन।
-
3
पाठकों तक पहुँचेप्रिंट और ई-बुक, दोनों रूप में।
आज महफ़िल जमी है
-
480+
लोगों ने आज पोस्ट किया
-
96+
कविताएँ आज प्रकाशित हुईं
-
12+
इस महीने के आयोजन
-
7+
प्रतियोगिताएँ चालू हैं
पूरी कविता, पूरी महफ़िल
- पूरी कविताएँ और ग़ज़लें, बिना रुकावट
- अपनी रचना साझा करने का मंच
- रोज़ का चुना हुआ शब्द और शेर
- नई कविताएँ सबसे पहले
- पाठक
- 120K+
- भाषाएँ
- 12+
- लेखक
- 8K+